शारदीय नवरात्रि सातवाँ दिन: देवी कालरात्रि का महत्व, उत्पत्ति कथा, पूजा विधि और मंत्र!
शारदीय नवरात्रि सातवाँ दिन : देवी कालरात्रि — अंधकार और भय की भयंकर संहारक शारदीय नवरात्रि का सातवाँ दिन सबसे शुभ रातों में से एक है , जो देवी दुर्गा के सातवें और सबसे भयंकर स्वरूप देवी कालरात्रि को समर्पित है। इस डरावने फिर भी दयालु स्वरूप को अंधकार , अज्ञानता और भय के अंतिम संहारक के रूप में पूजा जाता है। इस रात को , जिसे सप्तमी भी कहा जाता है , उनकी पूजा तुरंत सभी नकारात्मक ऊर्जाओं , ग्रहों के कष्टों को दूर करने और भक्त को दिव्य सुरक्षा प्रदान करने वाली मानी जाती है। उत्पत्ति और कथा : रक्तबीज का संहार माँ कालरात्रि का अवतरण सबसे दुर्जेय राक्षसों , विशेष रूप से रक्तबीज से लड़ने के लिए हुआ था , जिसके पास यह वरदान था कि उसके रक्त की हर बूँद से एक नया राक्षस उत्पन्न होगा। उसे नष्ट करने के लिए , माँ दुर्गा ने अपनी सुनहरी त्वचा का त्याग किया और कालरात्रि के भयंकर काले रूप को धारण किया। अपने गहरे रंग , बिखरे बालों और भयानक रूप के साथ...