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शारदीय नवरात्रि का पहला दिन: माँ शैलपुत्री का महत्व, पूजा विधि और मंत्र!

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शारदीय नवरात्रि दिव्य स्त्री शक्ति का नौ दिनों का उत्सव है, और यह माँ शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होता है, जो देवी दुर्गा का पहला स्वरूप हैं। उनका नाम "शैल" (पर्वत) और "पुत्री" (बेटी) के मेल से बना है, जो उन्हें पहाड़ों की बेटी के रूप में पूरी तरह से परिभाषित करता है। नवरात्रि का पहला दिन शुद्ध भक्ति, सादगी और आध्यात्मिक जागरण का दिन है, क्योंकि भक्त अपनी पवित्र यात्रा की शुरुआत करते हैं। उत्पत्ति और महत्व माँ शैलपुत्री की पूजा एक शक्तिशाली कथा से जुड़ी है। वह देवी सती का ही पुनर्जन्म हैं, जो राजा दक्ष की पुत्री थीं। सती ने अपने पति, भगवान शिव के प्रति अपने पिता के अपमान को सहन न कर पाने के कारण स्वयं को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया था। बाद में उन्होंने हिमालय के राजा की बेटी के रूप में पुनर्जन्म लिया। देवी के पहले स्वरूप और पुनर्जन्म के प्रतीक के रूप में, माँ शैलपुत्री उस आध्यात्मिक पथ की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करती हैं जो अंततः परमात्मा के साथ मिलन की ओर ले जाता है। वह शुद्धता, शांति और प्रकृति की अदम्य शक्ति का प्रतीक हैं। स्वरूप और प्रतीकवाद माँ शैलपुत्री...

शारदीय नवरात्रि 2025: तिथियाँ, महत्व, व्रत-पूजन विधि और विशेषताएँ!

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शारदीय नवरात्रि , भारत के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय हिंदू त्योहारों में से एक है, जो अब बस कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है। इस साल, यह पर्व एक अतिरिक्त दिन के साथ मनाया जाएगा, जिससे यह 10 दिनों का भक्ति, उत्सव और आध्यात्मिक उत्थान का महाउत्सव बन जाएगा। देवी दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत और दिव्य स्त्री शक्ति के सामर्थ्य का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि क्या है ? शारदीय नवरात्रि ( आश्विन नवरात्रि ) वर्ष के सबसे प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। यह देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों ( नवदुर्गा ) को समर्पित है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है , आत्मशुद्धि , शक्ति और आध्यात्मिक जागरण का उत्सव माना जाता है। शारदीय नवरात्रि 2025 की तिथियाँ प्रारंभ : सोमवार , 22 सितम्बर 2025 ( घटस्थापना ) समापन : गुरुवार , 2 अक्टूबर 2025 ( विजयदशमी / दशहरा ) घटस्थापना मुहूर्त 22 सितम्बर को प्रातः 06:09 से 08:06 बजे तक घटस्थापना का शुभ समय रहेगा। देवी आगमन और प्रस्था...