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भगवान विष्णु: हिंदू धर्म में संरक्षण और रक्षक का प्रतीक!

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भगवान विष्णु: हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवता! हिंदू पौराणिक कथाओं में, भगवान विष्णु हिंदू त्रिमूर्ति में प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जिनमें ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) और शिव (विनाशक) शामिल हैं। विष्णु को ब्रह्मांड का रक्षक और संरक्षक माना जाता है। उन्हें अक्सर नीले रंग के शरीर के साथ चित्रित किया जाता है, जो एक सुनहरे मुकुट से सुशोभित होता है और विभिन्न दिव्य गुणों को धारण करता है। विष्णु के अवतार विष्णु पौराणिक कथाओं के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक उनका विभिन्न रूपों में अवतार लेने की क्षमता है, जिन्हें अवतार कहा जाता है। ये अवतार धर्म (धार्मिकता) को बहाल करने और बुराई को दूर करने के लिए पृथ्वी पर उतरते हैं। विष्णु के कुछ सबसे प्रसिद्ध अवतारों में शामिल हैं: मत्स्य: मछली अवतार, जिन्होंने मानवता को एक विनाशकारी बाढ़ से बचाया। कूर्म: कछुआ अवतार, जिन्होंने अमरता के अमृत को प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन में मदद की। वराह: सूअर अवतार, जिन्होंने पृथ्वी को समुद्र की गहराई से बचाया। नृसिंह: अर्ध-मानव, अर्ध-सिंह अवतार, जिन्होंने प्रह्लाद को उसके राक्षसी पिता, हिरण्यकश्यपु से बच...

देव उठनी ग्यारस - भगवान विष्णु के चार महीने की लम्बी निद्रा से जागने का दिन!

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देव उठनी ग्यारस (जिसे देव उत्थान एकादशी या देव उठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है) कार्तिक महीने (आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर) में शुक्ल पक्ष (चंद्रमा का बढ़ता चरण) के 11वें दिन (एकादशी) को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह वह दिन है जब भगवान विष्णु अपनी चार महीने की लंबी ब्रह्मांडीय नींद से जागते हैं, जिसके दौरान वे ब्रह्मांडीय महासागर में विश्राम करते हैं, जिसे चतुर्मास कहा जाता है। देव उठनी ग्यारस के बारे में मुख्य बातें: महत्व: यह नए उद्यम, विवाह और अन्य महत्वपूर्ण जीवन की घटनाओं को शुरू करने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है। अनुष्ठान: देव उठनी पूजा: भक्त भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। तुलसी विवाह: भगवान कृष्ण और तुलसी के पौधे के बीच एक प्रतीकात्मक विवाह समारोह किया जाता है। शुभ काल: देव उठनी ग्यारस के बाद की अवधि शादियों और अन्य समारोहों के लिए अत्यधिक शुभ मानी जाती है। व्रत: इस दिन कई लोग कठोर उपवास रखते हैं, केवल जल या फल ग्रहण करते हैं। इस वर्ष देवउठनी ग्यारस 12 नवंबर, 2024 को मनाई गई। देव उठनी ग्यारस पर  क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना च...