शारदीय नवरात्रि छठा दिन: देवी कात्यायनी—साहस और प्रेम की योद्धा देवी!
शारदीय नवरात्रि छठा दिन: देवी कात्यायनी का महत्व, उत्पत्ति कथा, प्रिय भोग, फूल, पूजा विधि और मंत्र! शारदीय नवरात्रि का छठा दिन देवी कात्यायनी को समर्पित है , जो देवी दुर्गा का छठा और शक्तिशाली स्वरूप हैं। उन्हें भयंकर योद्धा देवी के रूप में पूजा जाता है , जो अन्याय के विरुद्ध धार्मिक क्रोध और बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस शुभ दिन पर उनकी पूजा करने से अपार साहस मिलता है , भय दूर होता है , और विवाह तथा साथित्व से संबंधित गहरी इच्छाएं पूरी होती हैं। उत्पत्ति और कथा : महिषासुर का संहार माँ कात्यायनी की उत्पत्ति हिंदू पौराणिक कथाओं की सबसे आकर्षक कहानियों में से एक है। जब महिषासुर नामक राक्षस अजेय हो गया और स्वर्ग को सताने लगा , तो त्रिदेवों ( ब्रह्मा , विष्णु और शिव ) तथा अन्य देवताओं ने अपनी सामूहिक दिव्य शक्ति और क्रोध को एकत्र किया। इस सामूहिक शक्ति ने देवी कात्यायनी के उग्र और सुंदर रूप को प्रकट किया। ...