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Interesting story of Shiva devotee Rishi Markandeya who conquered death and attained immortality!

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This eternal inspirational story is about the short-lived sage Markandeya becoming immortal with the blessings of Lord Shiva. This 2-minute story is an interesting story about Lord Shiva defeating Yamraj and granting immortality to his devotee Markandeya. Sage Mrikand was leading an ascetic life in a forest. His wife was Marudhwati. They remained childless for a long time. Mrikand did rigorous penance for many years to please Lord Shiva for a child. Lord Shiva appeared before him in all his glory. He said, “I am pleased with your devotion. Ask me for any boon you desire.” Mrikandu was very happy. He prayed to Lord Shiva thus: “O Lord! I am childless. Grant me a son.” Lord Shiva replied, “Do you want a virtuous, intelligent and pious son who will live for sixteen years or a dull-witted, evil-tempered son who will live for a long time?” Sage Mrikandu did not hesitate over the choice. He did not want a useless son. He only pleaded for a short-lived son whom he could be proud of. Lord Shi...

दीपावली भगवान राम के अयोध्या लौटने की ख़ुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर माँ लक्ष्मी की पूजा क्यों? जानिये पूरी सनातन कहानी!

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जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है?  जानिये पूरी सनातन कहानी! यह सनातन प्रेरक तथ्यात्मक जानकारी हिन्दू पवित्र त्यौहार दीपावली के सम्बन्ध में हैं| जिसमें वर्तमान पीढ़ी के कुछ यक्ष प्रश्नों का सटीक उत्तर दिया गया हैं|   हिन्दू त्यौहार दीपावली के सम्बन्ध में आज के बच्चों के कुछ प्रश्न हैं, जानिये क्या हैं: अधिकतर घरों में बच्चे के मन में अपने त्यौहार दीपावली के सम्बन्ध में यह प्रश्न अवश्य पूछते हैं: १. जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है?  राम और सीता की पूजा क्यों नही?  २. दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं? इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते। आज की शब्दावली के अनुसार कुछ ‘लिबरर्ल्स लोग’  युवाओं और बच्चों के मस्तिष्क में यह प्रश्न डाल रहें हैं कि लक्ष्मी पूजन का औच...

एक शिव-भक्त को साक्षात् दर्शन देने वाले ‘जागृत महादेव’ की कथा!

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केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’?, जानिये कैसे साक्षात् दर्शन दिए एक शिव-भक्त को?  यह सनातन प्रेरक कहानी केदारनाथ में स्थित ‘जागृत महादेव’ की है, जहाँ भोलेनाथ ने एक शिव-भक्त को  उसके ६ महीने को एक रात्रि में परिवर्तित कर साक्षात् दर्शन दिए| यह २ मिनट की बहुत ही रोचक कहानी देवों  के देव महादेव के भक्तों के प्रति प्रेम की हैं|   एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए।  आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये। लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहु...

क्या कालिदास भी अहंकारी हो गए थे? जानिये, माँ सरस्वती ने उन्हें कैसे सबक सिखाया!

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यह सनातन प्रेरक कहानी कालिदास के ज्ञान और सम्मान के कारण अहंकार के उत्पन्न होने पर माँ सरस्वती द्वारा सबक सिखाने की है|  एक समय की बात है जब कालिदास प्यास से व्याकुल होकर एक वृद्ध स्त्री से पानी पिलाने की गुजारिश करने लगे! कालिदास बोले :- "माते पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा" ! स्त्री बोली :- बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो। मैं अवश्य पानी पिला दूंगी। कालिदास ने कहा :- मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें। स्त्री बोली :- "तुम पथिक कैसे हो सकते हो" ? , पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं ! हमेशा चलते रहते हैं। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ। कालिदास ने कहा :- मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें। स्त्री बोली :- "तुम मेहमान कैसे हो सकते हो" ? संसार में दो ही मेहमान हैं। पहला धन और दूसरा यौवन ! इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम ? (अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे) कालिदास बोले :- मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें। स्त्री ने कहा :- "नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा...