श्री विष्णु स्तुति पाठ: संपूर्ण श्लोक, अर्थ और नित्य पाठ के चमत्कारी लाभ!

 

श्री विष्णु स्तुति पाठ: संपूर्ण श्लोक, अर्थ और नित्य पाठ के चमत्कारी लाभ!

श्री विष्णु स्तुति: श्लोक, हिंदी अर्थ और धार्मिक महत्व

श्री विष्णु स्तुति (Shree Vishnu Stuti) भगवान विष्णु की आराधना का एक परम कल्याणकारी और प्रभावशाली मंत्र-समूह है। इसका नित्य पाठ करने से जीवन के सभी कष्टों, बाधाओं और पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

श्री विष्णु स्तुति (संस्कृत श्लोक)

श्री विष्णु स्तुति

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्,

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

औषधे चिंतये विष्णुम भोजने च जनार्दनम,

शयने पद्मनाभं च विवाहे च प्रजापतिम,

युद्धे चक्रधरम देवं प्रवासे च त्रिविक्रमं,

नारायणं तनु त्यागे श्रीधरं प्रिय संगमे,

दुःस्वप्ने स्मर गोविन्दम संकटे मधुसूधनम,

कानने नारसिंहम च पावके जलाशयिनाम्,

जलमध्ये वराहम च पर्वते रघु नन्दनं,

गमने वामनं चैव सर्व कार्येशु माधवं।

षोडशैतानी नामानी प्रातरुत्थाय यह पठेत,

सर्वपापा विनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते॥

श्री विष्णु स्तुति का हिंदी अर्थ

1. विघ्ननाशक ध्यान श्लोक

  • श्लोक: शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

  • अर्थ: जो श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं, जो सर्वव्यापी हैं, जिनका वर्ण चंद्रमा के समान उज्ज्वल है, जिनकी चार भुजाएं हैं और जिनका मुख सदा प्रसन्न रहता है, उन भगवान विष्णु का सभी बाधाओं की शांति के लिए ध्यान करें।

2. ध्यान एवं वंदना श्लोक

  • श्लोक: शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं... वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

  • अर्थ: जिनकी आकृति परम शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवों के देव हैं, पूरे विश्व के आधार हैं, आकाश के समान सर्वव्यापी हैं, मेघ के समान श्यामवर्ण और अति सुंदर अंगों वाले हैं। जो माता लक्ष्मी के पति हैं, कमल के समान नेत्रों वाले हैं, जिन्हें योगी ध्यान के द्वारा प्राप्त करते हैं, जो संसार के भय को हरने वाले और समस्त लोकों के स्वामी हैं — ऐसे श्री हरि विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।

किस समय भगवान के किस रूप/नाम का स्मरण करें (16 नाम)

स्तुति के अनुसार, जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में श्री विष्णु के विशिष्ट रूपों का ध्यान करना चाहिए:

परिस्थिति / कार्यस्मरणीय नाम/रूप

औषधि (दवा) लेते समय

विष्णु

भोजन करते समय

जनार्दन

सोते समय

पद्मनाभ

विवाह के समय

प्रजापति

युद्ध/संघर्ष के समय

चक्रधर

यात्रा या प्रवास में

त्रिविक्रम

शरीर त्याग (मृत्यु) के समय

नारायण

प्रियजनों से मिलते समय

श्रीधर

बुरे सपने आने पर

गोविंद

संकट या विपत्ति के समय

मधुसूदन

जंगल/वन्य स्थान में

नारसिंह

अग्नि/आग के भय में

जलाशयिन (समुद्र शयन करने वाले)

जल के बीच (जल संकट में)

वराह

पर्वत पर/दुर्गम स्थान पर

रघुनंदन (श्री राम)

चलते/गमन करते समय

वामन

समस्त कार्यों को प्रारंभ करते समय

माधव

श्री विष्णु स्तुति पाठ के लाभ

अंतिम श्लोक (षोडशैतानी नामानी प्रातरुत्थाय यह पठेत...) के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर इन 16 नामों का पाठ करता है, उसे निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:

  1. पापों से मुक्ति: मनुष्य के सभी जाने-अनजाने किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं (सर्वपापा विनिर्मुक्तो)।

  2. संकटों से रक्षा: यात्रा, संकट, भय और स्वप्न दोषों से पूर्ण सुरक्षा मिलती है।

  3. मोक्ष/विष्णुलोक की प्राप्ति: देहांत के पश्चात साधक को परम धाम विष्णुलोक (बैकुण्ठ) में स्थान प्राप्त होता है (विष्णुलोके महीयते)।

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