चैत्र नवरात्रि 2026 पांचवा दिन: माँ स्कंदमाता पूजा, महत्व और कथा!

चैत्र नवरात्रि 2026 पांचवा दिन: माँ स्कंदमाता पूजा, महत्व और कथा!

चैत्र नवरात्रि 2026 के पांचवें दिन हम माँ स्कंदमाता की उपासना करते हैं। स्कंदमाता का अर्थ है 'स्कंद की माता'। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें इस नाम से जाना जाता है। वे ममता, वात्सल्य और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं।

वर्ष 2026 में, चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन सोमवार, 23 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।


माँ स्कंदमाता की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब तारकासुर नामक राक्षस ने चारों ओर कोहराम मचा रखा था और उसे केवल शिव पुत्र ही मार सकता था, तब माता पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) को युद्ध के लिए तैयार करने के लिए यह ममतामयी रूप धारण किया। माँ स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं; दो हाथों में वे कमल का फूल धारण करती हैं, एक हाथ अभय मुद्रा में रहता है और चौथे हाथ से वे अपनी गोद में बाल कार्तिकेय को पकड़े हुए हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।

माँ स्कंदमाता की पूजा का महत्व

  • ममता और संरक्षण: उनकी पूजा करने से भक्त को माँ के समान संरक्षण प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति आती है।

  • मोक्ष और ज्ञान: स्कंदमाता विशुद्ध चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी कृपा से साधक को उत्तम बुद्धि, एकाग्रता और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • दोहरा आशीर्वाद: माना जाता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की पूजा स्वतः ही हो जाती है और भक्त को दोनों का आशीर्वाद मिलता है।


माँ स्कंदमाता पूजा विधि (कैसे करें पूजा)

  1. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. कलश पूजन: सबसे पहले स्थापित कलश और गणेश जी की पूजा करें।

  3. अर्पण: माँ को पीले फूल (विशेषकर पीले गुलाब या गेंदा) और पीला चंदन अर्पित करें।

  4. विशेष भोग: माँ स्कंदमाता को केले का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है। आप पीले फल या केसर वाली मिठाई भी चढ़ा सकते हैं।

  5. मंत्र जप: रुद्राक्ष या चंदन की माला से उनके मंत्रों का 108 बार जप करें।


चैत्र नवरात्रि 2026: पांचवें दिन की विशेष जानकारी

  • शुभ रंग (Color Code): चैत्र नवरात्रि 2026 के पांचवें दिन (23 मार्च) का शुभ रंग सफेद (White) है। सफेद रंग पवित्रता, शांति और ध्यान का प्रतीक है, जो माँ के सौम्य रूप को दर्शाता है।

  • ग्रह संबंध: माँ स्कंदमाता बुध ग्रह (Mercury) को नियंत्रित करती हैं। उनकी पूजा से बौद्धिक क्षमता और वाणी में मधुरता आती है।

महत्वपूर्ण मंत्र और जप विधि

बीज मंत्र:

ॐ देवी स्कंदमातायै नमः

ध्यान मंत्र:

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया |

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ||

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